Mann Maze

Mann Maze

ऐसेही!

तुम्हारी दुनिया से अब हाँ दूर चले जायेंगे
अश्क छुपाने का कोई बहाना नहीं आता!

कहाँ कहाँ ढूंडोगे मुझे
उड़ते पंछियों का कोई ठिकाना नहीं होता!
महेश.

No comments:

Post a Comment