जब छोटी छोटी बातो मे
हम हसते थे रोते थे,
तबसे उससे प्यार किया...
जब सावन के मौसम मे
झूम झूम के गाते थे,
तबसे उससे प्यार किया...
जब बारिश कि रिमझिम मे
एक छाते मे भिगे थे,
तबसे उससे प्यार किया...
जब छुप छुप के आधी रातो मे
छत पे तारे गीनते थे,
तबसे उससे प्यार किया...
जब सपनो मे उसको देखकर
खुद पे हि हसते थे,
तबसे उससे प्यार किया...
जब कोरी किताबो मे उसका नाम लिखकर
स्याही खतम करते थे,
तबसे उससे प्यार किया...
जब उसकी धडकन सुनने के लिये
खुद कि धडकन थाम लेते थे,
तबसे उससे प्यार किया...
जब हर सांस के संग
उसकी मौजुदगी मेहसूस करते थे,
तबसे उससे प्यार किया...
तनहाई के इस दौर मे यारो...
अब तो खुद भी भूल चुका हुं,
..कबसे उससे प्यार किया...
महेश.
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