Mann Maze

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कुछ दिल-से...

उस शहर कि हर गली गली से वाकीत है हम..
जिस गली कि आरजू थी, वहा किसी और का बसेरा पाया...

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उस शेहर कि गली गली से वाकीत है हम...
बस जिसकी आस थी वो गली अब हमारी नही रही!

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इक जमाने मे बसाया था
अपना आशीयां हमने तेरे शहर मे..

गजब लोग है तेरे शहर के...
ऐ सनम..
अब पुछते है, वो जला हुआ मकान किसका है?

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हमने तो सोचा कि बस वोही बेवफा है..
जिसने हमे गम-ए-महोब्बत मे अकेला छोडा है..

दोस्तों..

तन्हा रातों कि बेवफाई का सर्-ए-अंजाम
हमने कभी देखा नही था..

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जो रातें कभी गुजरती थी सपनो मे..

ऐ सनम..

आज फुर्जो मे बिखर गयी है!

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जालीम जमाने कि क्या बात करे यारो..
दिलवालो का घर जलाके...

(आज फक्र-ए-शौक से)
उनकी मोहोब्बतो कि कहानिया लोग सुनाते है!

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