आज सारे अरमान निकल गए!
मेरा हाल देख पत्थर दिल पिघल गए!
लिखे थे चुन चुन कर उनके लिए जो...
वो अल्फाज भी आंसुओं संग निघल गए!
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तुझे भूलने का हौसला तो नहीं...
मेरा चैन-ओ-सुकून कुर्बान होगा...
ये काम तो सदियों का है
चंद लम्हों में थोड़ी ख़तम होगा!
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लिखना चाहते तो बहोत कुछ चाहते है...
लिखने की वजह अब कुछ ख़ास न रही!
जो थी मेरे जीने की वजह कलतक...
यारों, आज वो मेरे पास न रही!
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उसकी रूसवाई कि यादों ने
जीना दुश्वार कर दिया...
कोई साथी न मिला तन्हाई में, यारों..
अब तन्हाई से हमने प्यार कर लिया!
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तौहीन मत दो उस इश्क की मुझे..
ये वो आग है, जिसमे जलती सारी दुनिया है!
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