यूँ तो देखे है कितने मौसम हमने जिंदगी में...
वो साथ थे तो समां ही कुछ और था...
देखि है जन्नते हमने जिंदगी में...
जब उनके साथ थे वो जहाँ ही कुछ और था!
दुनिया भर के मैखानो से पि के आया हूँ...
उनकी आँखों में मगर, नशाही कुछ और था!
बरसो बीत गए यारों कुछ पलों की तरह
उनके साथ बिताये पलों में मगर, मजा ही कुछ और था!
की है हमने वफाये अपनी जाँ पर खेलकर...
उनकी बेवफाई का यारों, अंदाज ही कुछ और था..
यूँ तो उनके एक इशारे पे हम जान देते
तडपा तडपा के मारने का, अंदाज ही कुछ और था!
महेश.
प्रेम एक--अविष्कार अनेक!
No comments:
Post a Comment