दो लफझो में कैसे बताऊ मै तुम्हे..
के कैसी वो दिखती है, कैसे वो हसती है..
जब वो शरमाती है, तो मेरी जान कैसे जलती है....
देख के उसकी आंखो में..दिल में इक आह सी उठती है..
कैसे बताऊ मै तुम्हे यारो...के कैसी वो दिखती है..
जब चलती है सडको पर....बहार साथ लेके चलती है..
देख के उसको..हर नौजवा कि धडकन मचलती है..
उसकी गर्म सांसो के संग...बिन बादल बारिश बरसती है...
नजरो के तीर जैसे...बिजलीया धरती को छुती है...
कैसे बताऊ मै तुम्हे यारो...कैसी वो दिखती है!
ओठो कि पंखुडीयों से...सुरो कि सरगम निकलती है..
आवाज कि मिठास कम्बख्त पत्थर दिल पिघलाती है!
खुशबू से उसकी यारो...सुबह कि हर किरण मेहक जाती है!
काले बालो कि छाव में...सुनेहारी शाम रंग लाती है..
और कैसे बताऊ मै यारो...कैसी वो दिखती है!
होती है साथ जब...मेरी दुनिया पुरी लगती है..
मेरे लहू में..हर इक रूह में...अब वो हि वो बसती है..
रूठ जाये कभी तो...धडकन रुक सी जाती है...
हसके गले लग जाये तो...जान में जान आती है!
और कैसे बताऊ मै यारो...कैसी वो दिखती है!
महेश. (१३/११/२०११)
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