Mann Maze

Mann Maze

आलम-ए-मदहोशी

कल की बारिश में लिखी गयी कुछ पंक्तियाँ!

आज मौसम ने हमपर
एक एहसान कर दिया..

तेज़ बारिश में उसने मुझे
अपनी बाँहों में भर लिया!

काबू तो हमारा खुद पे था
उन्होंने अपना सब नीलाम कर दिया!

बहते गए हम कुछ ऐसे
इस आलम-ए-मदहोशी में,

बारिश की बूंदों पे सारा
इल्जाम हमने लगा दिया!

माही!

No comments:

Post a Comment